Transducer in Hindi | ट्रांसड्यूसर परिभाषण, प्रकार, बनावट पूरी जानकारी

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आज अगर हम देखे तो सभी जगहों पर इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बोहोत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है ताकि काम आसानी से हो जाये | आज हम Transducer in Hindi इस आर्टिकल में ट्रांसड्यूसर के बारेमे जानकारी लेंगे इंडस्ट्रीज में और ऑटोमेशन में इलेक्ट्रिकल या फिर मैकेनिकल मात्राओ को मापना जरुरी होता है इसलिए transducer का इस्तेमाल किया जाता है | इसलिए  |

Table of Contents

Transducer in Hindi (ट्रांसड्यूसर क्या है ?):-

Transducer defination in hindi :-

यह एक ऐसा यंत्र है जो एक उर्जा प्रकार को दुसरे उर्जा प्रकार में बदलता है या परिवर्तित करता है, एक भौतिक राशी को दुसरे प्रकार की भौतिक राशी में रूपांतरित करता है |

ट्रांसड्यूसर किसी भी physical quantity को electrical  quantity जैसे की voltage और current में रूपान्तर करने की क्षमता रखता है | इस रूपांतरण के बाद उस quantity को measure करना आसान हो जाता है | voltage या current मो मापने के लिए multimeter का इस्तेमाल किया जाता है |

Transducer से मिलाने वाले electrical signal को फिर उसके physical quantity को automaticaly control करने के लिए या फिर सिर्फ देखने के लिए उपयोग किया जाता है | निचे दिखाए चित्र में हम बेसिक ट्रांसड्यूसर रचना देख सकते है |

Transducer block diagram showing input and out put
Transducer in Hindi | ट्रांसड्यूसर क्या है ?

Transducer को pick up element भी कहा जाता है | इसमे दो भाग होते है एक होता है सेनसिंग इलेमेंट और दूसरा होता है transduction element . sensing या फिर detecting के लिए sensor का इस्तेमाल किया जाता है और transduction element sensor आउटपुट को इलेक्ट्रिकल रूप में बदल देता है |

निचे दिखाए चित्र में हम transducer block diagram देख सकते है |

Transducer block diagam showing semsing element and transducing element
Transducer in Hindi | transducer block diagram

कभी कभी transducer रक system का पार्ट होता है और दुसरे उपकरणों के साथ मिलकर काम करता है ताकि एक अछा आउटपुट मिल सके, इस तरह के circuit को signal conditioning circuit कहा जाता है |

Requirements of transducer (ट्रांसड्यूसर की आवश्यकताएं ):-

Best requirements आगे दिए गए है :-

  1. 1) Ruggedness (कठोरता):- ट्रांसड्यूसर इस तरह से बना होना चाहिए की वो overload को भी झेल सके, एक अछे ट्रांसड्यूसर की कठोरता ज्यादा होती है |
  2.  Sensitivity (संवेदनशीलता):-ट्रांसड्यूसर संवेदनशील होना चाहिए ताकि वो quantity में आये थोड़े से बदलाव को भी भाप सके, एक उदाहरण से देखे to thermocouple की संवेदशिलता mV/℃ में दर्शायी जाती है | Sensitivity जीतनी ज्यादा हो उतना ही बेहतर होता है |
  3. Size (आकार) :- ट्रांसड्यूसर का आकार कम होना जरुरी है, साथी साथ उसका shape और volume भी कम होना चाहिए ताकि उसे जिस जगह मापना है उस जगह पर अछे से लगाया जा सके |
  4. Speed of response (प्रतिक्रिया की गति) :- यह ये दर्शाता है की जब quantity में बदलाव होता है तब  ट्रांसड्यूसर कितनी तेजीसे respond करता है | प्रतिक्रिया की गति जीतनी ज्यादा हो सके उतना ही अच्छा होता है |
  5. Repeatability(दोहराने की क्षमता ) :- ट्रांसड्यूसर की यह क्षमता होनी चाहिए कीजब input signal मिले to उसी समय output signal को दे और यह लगातार होता रहे |
  6. Instrumentation (इंस्ट्रुमेन्टेशन्स) :- Transducer के साथ इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का output इतना होना चाहिए की transducer अछे तकिकेसे उसे convert कर सके |
  7. High stability and reliability (उच्च स्थिरता और विश्वसनीयता):- मापते समय इसमे कम से कम error याने त्रुटि मिले और इसपे बाहरी तत्वों की वजह से कोई फरक न पड़ सके जैसे की तापमान, कंपन, और दुसरे वतावार्निय बदल |

Transducer selection factor (ट्रांसड्यूसर चयन घटक ):-

  1. Nature of measurement (माप की प्रकृति):- किस तरह की मात्रा को मापना है इसपर आधारित होता है की कोनसा ट्रांसड्यूसर इस्तेमाल करना है | जैसे की अगर capacitance को मापना है तो उसके लिए capacitance sensor की जरुरत होगी |
  2. Operating range (ऑपरेटिंग रेंज) :- ट्रांसड्यूसर को इस तरह चुना जाये ताकि वह अच्छी सीमा तक इस्तेमाल हो सके
  3. Enviromental condition (बाहरी स्थिति):- जब ट्रांसड्यूसर का चयन किया जाये तब यब बाते भी जानना जरुरी है की जहा पर इसका इस्तेमाल होने वाला है वहा पर virbation, shock, या फिर tempreture में कोई बदलाव आ रहे है क्या|
  4. Cost and availability (मूल्य और उपलब्धता ) :- ट्रांसड्यूसर का मूल्य कितना है और वो समय पर उपलब्द है की nahi ये भी महत्त्व पूर्ण है | ट्रांसड्यूसर का देखभाल का खर्चा कम हो, इस्तेमाल करने में आसान हो, रिलाएबल हो |
  5. Sensitivity ( संवेदनशीलता ) :- ट्रांसड्यूसर की संवेदनशीलता जीतनी ज्यादा होगी उतना ही बेहतर होता है |
  6. Measuring system compatibility ( मापन प्रणाली अनुकूलता ) :- जिस ट्रांसड्यूसर का चयन किया आने वाला है वो इलेक्ट्रिकल सिस्टम के साथ अनुकूल होना चाहिए, ट्रांसड्यूसर का आउटपुट और दूसरे measurement सिस्टम का दोनों पर किसी प्रकार का असर नहीं होना चाहिए

Types of transducer(ट्रांसड्यूसर के प्रकार ):-

  1. Mechanical and electrical transducers ( मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल )
  2. Active and passive transducer (एक्टिव और पैसिव ट्रांसड्यूसर)
  3. Based on quantity to be measured (किस तरह की मात्रा को मापना है  )
  4. Analog and digital transducer (एनालॉग और डिजिटल)
  5. Primary and secondary transducer (प्राइमरी और सेकेंडरी ट्रांसड्यूसर)
  6. Transducers and invese transducer (ट्रांसड्यूसर और इन्वर्टर ट्रांसड्यूसर)
  7. Based on transduction principle used (ट्रांसडक्षण सिद्धांत पर आधारित )

1) Mechanical and electrical transducers ( मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल ) :-

A) Mechanical transducer:- मैकेनिकल ट्रांसड्यूसर में system के physical condition को दुसरे output form में बदल दे | mechanical transducer में output भी mechanical ही होता है | mechanical transducer के कुछ उदाहरण है जैसे की Bellows, Bourdon tube, Diaphragms, Springs, Pendulum scale, monometer, Vanes, turbines इत्यादी |

B) Electrical transducer :- इलेक्ट्रिकल ट्रांसड्यूसर में नॉन-इलेक्ट्रिकल quantity को जैसे की pressure याने दबाव, tempreture याने तापमान, को इलेक्ट्रिकल मात्रा जैसे की voltage और current में रूपान्तरित करता है |

2) Active and passive transducer (एक्टिव और पैसिव ट्रांसड्यूसर) :-

A) Active transducer:- इसके ऑपरेशन के लिए किसी तरह के बाहरी पॉवर सोर्स की जरुरत नहीं पड़ती है | इसलिए इन्हे self generation type transducer भी कहा जाता है | एक्टिव ट्रांसड्यूसर के और भी प्रकार है जो निचे चित्र में और उनकी सूचि भी दिखाई गयी है |

active transducer types
Transducer in Hindi | active transducer types

active transducers self generating device होते है इसलिए ये energy conversion principle पर काम करते है | इसमे हमें electrical आउटपुटमिलता है जैसे की tempreture को electrical में बिना किसी बाहरी energy source के |

B) Passive trasducers :- इस तरह के transducer को चलने के लिए बाहरी पॉवर सप्लाई की जरुरत पड़ती है | इसमे बाहरी सप्लाई के लिए DC पॉवर सप्लाई या फिर audio frequency generator का इस्तेमाल किया जाता है |

passive transducer के प्रकार निचे दिए गये है |

passive trnasducer types chart
Transducer in Hindi | active transducer types

पैसिव ट्रांसड्यूसर में आउटपुट signal resistance, capacitance या फिर दुसरे electrical मात्रा में होता है |

 3) Based on quantity to be measured (किस तरह की मात्रा को मापना है  ) :-

किस तरह की मात्रा को मापना है उसके आधार पर कितने प्रकार के है वो निचे दिए गए है |
A) Temperature transducer (तापमान ट्रांसड्यूसर)
B) Pressure transducer (दबाव ट्रांसड्यूसर)
C) Displacement transducer (विस्थापन ट्रांसड्यूसर )
D) Flow transducers (प्रवाह ट्रांसड्यूसर)
E) Other (अन्य)

4) Analog and digital transducer (एनालॉग और डिजिटल):-

A) Analog transducer :- इस तरह के transducer की आउटपुट मात्रा एनालॉग form में होती है,इसका मतलब जबतक इनपुट है तबतक आउटपुट मात्रा दिखाती रहेगी  | इसके कुछ उदाहरण जैसे की thermocouple, LVDT, strain gauge इत्यादी

B) Digital transducer :- इस तरह के transducer की आउटपुट मात्रा डिजिटल form में होती है |

5) Primary and secondary transducer (प्राइमरी और सेकेंडरी ट्रांसड्यूसर):-

कुछ transducer में मैकेनिकल और साथी साथ इलेक्ट्रिकल उपकरण भी होते है | mechaical उपकरण physical quantity को mechanical signal में मापते है | इस तरह के mechanical उपकरण को प्राइमरी ट्रांसड्यूसर कहा जाता है |
उसके बाद mechanical signal electrical signal में रूपांतरित किया जाता है इस तरह के उपकरणों को सेकेंडरी ट्रांसड्यूसर कहा जाता है |

6) Transducers and inverse transducer (ट्रांसड्यूसर और इन्वर्टर ट्रांसड्यूसर):-

ट्रांसड्यूसर non-electrical मात्रा को electrical मात्रा में बदलते है जब की inverse ट्रांसड्यूसर electrical मात्रा को non-electrical मात्रा में बदल देते है |

7) Based on transduction principle used (ट्रांसडक्षण सिद्धांत पर आधारित ):-

A) Capacitive transduction
B) Electromagnetic transduction
C) Inductive induction
E) Photovoltaic transduction
F) Photo conductive transduction 
 

8) Other transducers:-

A) Resistive Transducer(प्रतिरोधी ट्रांसड्यूसर)
  1. Potentiometer 
  2. Resistive pressure transducer
  3. Resistive position transducer
B) Temperature transducer:-
C) Inductive transducer:-

 Advantages of Electrical transducer (इलेक्ट्रिकल ट्रांसड्यूसर के फायदे ) :-

  1. इलेक्ट्रिकल आउटपुट को आसानी से बढाया जा सकता है |
  2. इसमे घर्षण से होने वाले effect कम होते है |
  3. इसका आउटपुट कही पर से भी रेकॉर्ड किया जा सकता है |
  4. electrical transducer में बोहोत कम पॉवर का इस्तेमाल होता है |
  5. Electrical signal को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सकता है और सुधारा भी जा सकता है |
  6. इसका आकार और वजन कम होता है |

Disdvantages of Electrical transducer (इलेक्ट्रिकल ट्रांसड्यूसर के नुकसान ) :-

  1. समय की मार और drift की वजह से यह ट्रांसड्यूसर थोडा कम विश्वसनीय होता है |
  2. इसमे लगने वाले sensing elements और signal को सुधारने वाले elements थोड़े महगे होते है |
  3. कई बार mechanical के मुकाबले electrical transducer सही नहीं होते है |

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तो दोस्तों आज हमने Transducer in Hindi इस आर्टिकल में ट्रांसड्यूसर क्या है ? यह जानने की कोशिश की साथी साथ  ट्रांसड्यूसर परिभाषण, प्रकार, बनावट और  उपयोग के बारेमे भी जाना |
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नमस्ते दोस्तों Electrical dose इस ब्लॉग्गिंग वेबसाइट में आपका स्वागत है | इस वेबसाइट में हम आपको इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स के बारेमे बोहोत सारी अछि महत्वपूर्ण,और उपयोगी जानकारी जानकारी देते है. मैंने इलेक्ट्रिकल अभियांत्रिकी याने electrical engineering में diploma और Bachelor of engineering की है मुझे इलेक्ट्रिकल के बारेमे थोड़ी बोहोत जानकारी है, इसी लिए मैंने यह तय कर लिया की इस क्षेत्र में ब्लॉग बनाऊ और थोड़ी बोहोत जानकारी आपतक पहुचाऊ |

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