LVDT in Hindi | Linear variable differential transducer

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दोस्तों आज हम LVDT in Hindi इस आर्टिकल में Linear variable differential transducer क्या है किस तरह से काम करता है ये जानेंगे साथी साथ इसके फायदे और नुकसान और उपयोग के बारेमे जानेंगे |

LVDT in hindi (LVDT क्या है ?) :-

LVDT का fullform होता है Linear variable differential transducer होता है | यह एक electromechanical transducer है इसमे rectilinear motion याने की सीधे गति को याने mechanical मात्रा को electrical signal में बदल देता है | निचे दिखाए चित्र में हम LVDT का construction देख सकते है |

LVDT in Hindi | Linear variable differential transducer
LVDT in Hindi | Linear variable differential transducer

Construction of LVDT (LVDT की बनावट ) :-

इसमे एक primary winding होती है और दो एक जैसी secondary windig होता है |यह winding axialy राखी होती है और cylindrical coil पर wound की होती है |

निचे दिखाए चित में हम इसकी बनावट को देख सकते है |

LVDT in Hindi | Linear variable differential transducer
LVDT in Hindi | Linear variable differential transducer

coil बनावट के बिच में एक rod shaped magnetic core को लगाया जाता है | यह rod low reluctance path प्रदान करता है, ताकि magnetic flux coil के साथ लिंक हो सके |

जैसा की हम ऊपर दिखाई चित में देख सकते है की दोनों secondary windings सीरीजमें जुडी होती है | इसलिए इन दोनों में का voltage में opposite polarities होती है |

इसमे output voltage मिलता है :-

  eo = eo1 – eo2
यहाँ पर eo1 और  eo2 दोनों coil में उत्पन होने वाला emf है |
 
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Operation of LVDT (LVDT का कार्यसिधान्त ):-

इसमे primary winding AC source से जुड़ा होता है | अगर मान लीजिए की कोर coil assembly के बिलकुल केंद्र में है उस वक्त दोनों सेकेंडरी वाइंडिंग में एक जैसा flux linkage होगा | उसकी वजह से सेकेंडरी induced voltage भी एक जैसा होगा पर उनमे विपरीत polarities होंगी |

LVDT का output voltage होगा eo, इसलिए इस स्थिति को null position कहा जाता है |

अगर कोर null position से हटके अगर secondary 1 की तरफ जाये तब secondary 1 में ज्यादा flux linkage होगा और secondary 2 में कम होता जायेगा | इसलिए eo1 में का volatage eo2 से ज्यादा होगा |

वैसे ही अगर कोर secondary 2 के तरफ जाता है तब eo2 eo1 से ज्यादा होगा और eo negative हो जायेगा | आउटपुट signal को linearly आगे पीछे होता है इसलिए इसमे Linear शब्द का इस्तेमाल किया जाता है |

 

Performance characteristic of LVDT (LVDT की प्रदर्शन विशेषता) :-

1) Null voltage (शून्य वोल्टेज) :-

Idealy अगर देखा जाये तो LVDT काआउटपुट zero होता है जब कोर null position पर होता है | लेकिन प्रैक्टिकल में अगर देखे तो थोडासा voltage होता ही है जब कोर null position पर होता है | यह इसलिए होता है क्यू की Harmonics मौजूद होती है |

2) Sensitivity ( संवेदनशीलता ) :-

संवेदनशीलता को mV/mm के दर्शाया जाता है | और LVDT में 1 से 2 mV/mm होता है | संवेदनशीलता जीतनी ज्यादा हो सके उतना ही अच्छा होता है |

Advantages of LVDT (LVDT के फायदे ) :-

  1. बोहोत ज्यादा सतिक होता है याने high accuracy |
  2. इसकी stability अछि होती है |
  3. resolution बोहोत अछा होता है |
  4. installation करना आसान होता है |
  5. ज्यादा तापमान पर भी अछे से काम करता है |
  6. इसकी sensitivity बोहोत ज्यादा होती है |

Disdvantages of LVDT (LVDT के नुकसान ):-

  1. LVDT एक्सटर्नल magnetic field से प्रभावित होता है , इसलिए इस प्रभाव को कम करने के लिए magnetic shield लगाना जरुरी होता है |
  2. इसका circuit complicated होता है |
  3. कोर के mass याने व्यापकता की वजह से LVDT को dynamic measurement याने की fast displacement में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है |

Application of LVDT (LVDT के उपयोग ):-

  1. LVDT का इस्तेमाल pressure, load, acceleration, force,weight इनको मापने के लिए इस्तेमाल होता है |
  2. soil की strength को मापने के लिए
  3. Hydraulic cylinder displacement में LVDT का इस्तेमाल किया जाता है |
  4. Robotic cleaner में इस्तेमाल किया जाता है |

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तो दोस्तों आज हमने LVDT in Hindi इस आर्टिकल में LVDT क्या है ? यह जानने की कोशिश की साथी साथ  LVDT परिभाषण, बनावट और  उपयोग के बारेमे भी जाना |
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