Transformer kya hai | Transformer in hindi

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 Transformer kya hai ? ट्रांसफार्मर एक पैसिव passive इलेक्ट्रिकल यंत्र है इसका इस्तेमाल AC voltage को कम या फिर ज्यादा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है बिना frequency को बदले | आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे की ट्रांसफार्मर क्या है (what is transformer in hindi) और उसके प्रकार कोंसे है ट्रांसफार्मर का कार्य सिधांत और चित्र इन सबके बारेमे जाननेकी कोशिश करते है |

ट्रांसफार्मर की खोज बोहोत पहले याने की सन 1880 के दशक में हुई थी लेकिन उस वक्त ट्रांसफार्मर transfomer का design उतना प्रभावशाली नहीं था | आगे जाके ट्रांसफार्मर के डिजाईन में सुधार किये गयेऔर उसके कम करने की क्षमता को बढाया गया ट्रांसफार्मर का कार्य सिधांत वही है बस उसमे बोहोत सारे सुधार किये गए 

इसी कारन के वजह से हम आज इतनी मात्रा में और अच्छी तरह से बिजली का इस्तेमाल कर पा रहे है | सन 1950 में 400 Kv विदुत ट्रांसफार्मर को पेश किया गया था उसके बाद बोहोत सारे निर्माता ओ ने 1980 में 800 Kv और उससे भी अधिक क्षमता के ट्रांसफार्मर का निर्माण किया गया | 

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Transformer kya hai

Table of Contents

Transformer kya hai? (What is Transformer in Hindi) :-

ट्रांसफार्मर एक स्थायी इलेक्ट्रिकल यंत्र है इसका इस्तेमाल AC voltage को एक circuit में से दुसरे circuit में स्थानांतरण किया जाता है frequency को बदले बिना | यह पूरी प्रक्रिया electromagnetic induction से होती है |इसका इस्तेमाल ज्यादा तर AC voltage को बढ़ाने के लिए याने voltage step up transformer या फिर AC voltage को कम करने के लिए याने voltage step down transformer के लिए इस्तेमाल किया जाता है |

ट्रांसफार्मर कार्य सिधांत (Working Principle of Transformer):-

ट्रांसफार्मर mutual induction और faradays low of electromagnetic induction के कार्य सिधांत पर कम करता है | ट्रांसफार्मर में दो coil होती है एक primary coil और एक secondary coil .primary साइड में हम इनपुट voltage देते है और secondary साइड में हमें आउटपुट मिलता है | secondary साइड में ही लोड connected होता है | voltage को बढ़ाना है या फिर कम करना है यार प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग के turns पर निर्भर करता है |

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जब हम primary winding में AC voltage सप्लाई देते है तब मैग्नेटिक फ्लक्स तैयार होता है इसकी वजह से सेकेंडरी coil में EMF induced होता है (faradays low of electromagnetic induction के कार्य सिधांत से ). अगर secondary circuit पूरा याने close होगा तब सेकेंडरी वाइंडिंग में current फ्लो होगा यह ट्रांसफार्मर का सरल कार्य सिधांत है |

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ट्रांसफार्मर के भाग (Parts of Transformer ):-

1) Core (कोर):-

कोर का यही उद्देश्य होता है की यह magnetic flux को एक बंद याने close पाथ दे | ट्रांसफार्मर का कोर core type और shell type में होता है | कोर टाइप में windings core के आजू बाजु में होती है और shell type में कोर windings के आजू बाजु में होता है | ट्रांसफार्मर का कोर बिच में होता है और यार laminated steel plates से बना होता है ताकि eddy current loss और iron loss को कम किया जा सके |

core के निर्माण में CRGO (cold-rolled grain-oriented) स्टील का इस्तेमाल किया जाता है | energy ट्रान्सफर अछि तरह से हो सके इसके लिए लैमिनेटेड कोर का इस्तेमाल किया जाता है |


2) Coil or Windings ( कुंडल या घुमावदार ):-

ट्रांसफार्मर में दो coil होती है एक primary coil और winding और एक secondary coil | कभीभी प्राइमरी वाइंडिंग में ही इनपुट AC voltage सप्लाई को दिया जाता है और सेकेंडरी में आउट पुट AC voltage मिलता है | primary coil और secondary coil एलेक्ट्रिकाली एक दुसरे से जुडी नहीं होती है | यह coil से दुसरे से बिलकुल अलग होती है और यह कोर के अजू बाजु में लपेटे हुए होती है |

दोनों वीडिंग  के turns अलग अलग या फिर एकसमान हो सकते है | अगर प्राइमरी वाइंडिंग के turns कम और सेकेंडरी वाइंडिंग के टर्न ज्यादा है तब आउटपुट में इनपुट के मुकबके ज्यादा voltage मिलेगा | अगर प्रिअमरी वाइंडिंग में ज्यादा और सेकेंडरी वाइंडिंग में कम turns होगी तब आउटपुट में  कम voltage मिलेगा |

अगर प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग के turns एकसमान है तब उसे आइसोलेशन ट्रांसफार्मर (isolation transformer) कहा जाता है और इसका इस्तेमाल circuit में fault होता है तब circuit के प्रोटेक्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता है |

3) Insulated sheet:-

primary coil और secondary coil के बिच में शीट लगायी जाती है तकि कोई short circuit ना हो पाए | यह vegitable fibre से बना होता है इन फिब्रेस को साथ सखकर एक sheet बनायीं जाती है |

4) Breather:-

breather को इसलिए लगाया जाता है ताकि जो बहार की नमी है वो ट्रांसफार्मर के अन्दर ना जा सके अगर नमी अन्दर गयी तो यह oil को ख़राब कर सकती है और उसकी वजह से transformer की कार्य क्षमता पर असर होजायेगा |

Breather में silica जेल का इस्तेमाल किया जा है यह जेल नमी को सोख लेता है | silica gel का कलर नीला होता है लेकिन जब वह नमी सोख लेता है तब उसका कलर पिंक गुलाबी हो जाता है |

5) Oil level indicator:-

transformer के अन्दर कितना oil बचा हुआ है यह जननके के लिए एक मीटर लगाया जाता है ताकि असनिसे पता चले की कितना oil बचा हुआ है | यह indicator टैंक के ऊपर लगा हुआ होता है |

6) Rdiator fan :-

Rdiator fan का इस्तेमाल ट्रांसफार्मर को ठंडा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है क्यू की जब लोड बढ़ता है तब वाइंडिंग की वजह से oil बोहोत ज्यादा गरम हो जाता है और उसकी वजह से कार्य क्षमता पर असर पड़ता है और अगर oil ज्यादा गरम हो जाये तब transformer failure भी हो सकता है |

raditor fan को छोटे transformer में नहीं लगाया जाता है इसका इस्तेमाल बड़े ट्रांसफार्मर में होता है |

7) Bushing:-

इसका इस्तेमाल लाइव कंडक्टर और टैंक जो की earth से कोनेक्ट्रेड होता है इन दोनों को insulate करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है | यह poroclain और epoxy से बने होते है | और यह थ्री फेस ट्रांसफार्मर में ही इस्तेमाल होते है |

8) Conservator tank (कांसेर्वटर टैंक):-

यह ट्रांसफार्मर के ऊपर लगा हुआ होता है यह cylindrical shape(बेलनाकार) में होता है |इसका मुख्य काम यह होता है की ट्रांसफार्मर के अन्दर के oil के विस्तार को संभालने का होता है |याने जब oil का विस्तार होता है तब वह conservator tank में जाता है |

conservator tank Reservoirरेसेर्विओर (जलाशय) की तरह भी कम करता है जब ट्रांसफार्मर का oil कम हो जाता है यब conservator से ही ट्रांसफार्मर के मुख्य tank को oil मिलता है |


Transformer कितने प्रकार के होते है (Types of Transformer):-

classification of transformer in hindi, ट्रांसफार्मर के प्रकार बोहोत सारे तत्वों पर निर्भर होते है जैसे की इनपुट voltage, कोर की रचना , पॉवर ट्रांसफार्मर ,measurment transformer ऐसे बोहोत सारे तत्वों पर आधारित होते है उन्ही के बारेमे हम निचे जानने की कोशिश करते है |


1)आउटपुट वोल्टेज के अधर पर (based on output voltage) :-

आउटपुट वोल्टेज के आधार पर ट्रांसफार्मर के दो प्रकार होते है जो की step up transformer और दूसरा step down transformer | जब voltage को बढ़ने की बात आती है तब step up transformer का इस्तेमाल किया जाता है| इसका इस्तेमाल thermal power plant, nuclear power plant, wind energy ऐसे पॉवर स्टेशन में वोल्टेज को stepup करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है |

Step up transformer:-

स्ट्रेप अप ट्रांसफार्मर में AC voltage को primary साइड मर=इ दिया जाता है | primary साइड में winding के turns कम होते है और secondary वाइंडिंग में ज्यादा turns होते है इसकी वजह से secondary में ज्यादा voltage मिलता है | इसका इस्तेमाल generating station पर किया जाता है ताकि high voltage को transfer किया जा सके | और भी बोहोत सारी जगह पर किया जाता है |

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Step down transformer:-

voltage को कम करने के लिए इसका इस्स्टेतेमाल किया जाता है | स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर में secondary coil की turns प्राइमरी वाइंडिंग के मुकाबले कम होती है इसलिए आउटपुट में कम voltage मिलता है | जब पॉवर जनरेटिंग स्टेशन हे high voltage आता है तब उसे कम करने की जरुरत होती है तब step down transformer का इस्तेमाल होता है |

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2) फेस की संख्या पर आधारित (based on number of phase):-

Single-phase transformer (सिंगल फेस):-

single फेस सप्लाई पर यह transformer कम करता है सिंगल फेस वोल्टेज को कम करने के लिए या फिर बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है | इसमे प्राइमरी साइड में सिंगल फेस सप्लाई दिया जाता है और सेकेंडरी साइड में सिंगल फेस सप्लाई मिलता है |


Three-phase transformer(तिन फेस):-

इसमे प्राइमरी में थ्री फेस सप्लाई दिया जाता है और सेकेंडरी साइड में थ्री फेस सप्लाई मिलता है | इसमे थ्री फेस सप्लाई को स्टेप अप या फिर स्टेप डाउन किया जाता है | इसका इस्तेमाल transmission और distribution में स्तेमाल होता है | 66 Kv से लेकर 440 Kv तक स्टेप अप किया जाता है |

3)कोर की रचना पर आधारित  (based on core construction):-

Shell type transformer:-

शैल टाइप ट्रांसफार्मर में coil कोर के अजू बाजु में लगी होती है | यह E और L शेप की पंक्तियों को जोड़कर बनाया जाता है| यह आयताकार में होता है | इसमे कम copper का इस्तेमाल होता है और इंसुलेशन भी कम लगता है ,इसे sandwich और disc winding भी कहा जाता है | shell type transformershell में कम losses होते है और एक magnetic circuit होता है | maintenace कठिन होता है लेकिन इसका mechanical strenghth बोहोत ज्यादा होती है 

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Core type transformer:-

इसमे वाइंडिंग कोर के इर्द गिर्द  होती है और इसकी लमिनतिओन्स L आकार के कटी होती है, core type transformer में copper ज्यादा लगता है और इंसुलेशन भी ज्यादा लगता है | वाइंडिंग साइड वाले भाग पे लगती है इसमे दो magnetic circuit होती है और losses ज्यादा होते है | लेकिन इसमे maintenace कम लगता है |साथी साथ आउटपुट कम होता है और इसमे natural कुलिंग नहीं होती है |

4) धारा परिणामित्र ट्रांसफार्मर (Measurement Transformer)

इसमे दो प्रकार के ट्रांसफार्मर आते है एक voltage और potential transformer और दूसरा current transformer इन्हे CT और PT भी कहा जाता है | इनका इस्तेमाल वोल्टेज और करंट को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है |

Voltage or potential transformer (PT):-

इसका इस्तेमाल वोल्टेज को नापने के लिए होता है इसमे भी दो वाइंडिंग याने प्राइमरी वाइंडिंग और सेकेंडरी वाइंडिंग होती है | high voltage को स्टेप डाउन करके voltage को measure किया जाता है | जहा पर multimeter का इस्तेमाल करना संभव नहीं है वहा पर voltage transformer याने PT का इस्तेमाल किया जाता है | यह स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर की तरह ही कम करता है | इसका इस्तेमाल voltage को नियंत्रण करनके लिए और relay में भी होता है |

Current transformer (CT) :-

करंट  ट्रांसफार्मर का इस्तेमाल current को नापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है | यह एक प्रकार का इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर है | इसका इस्तेमाल करके high voltage को बहोत कम मूल्य पर कम किया जाता है उसके बाद एक standard ammeter का इस्तेमाल करके बोहोत सावधानी पर सुविधाजनक रूप से करंट को मापा जाता है |

 

5) वाइंडिंग के आधार पर (based on winding arrangement):-

Two winding transformer:-

इसमे दो वाइंडिंग होती है एक प्राइमरी वाइंडिंग और दूसरी सेकेंडरी वाइंडिंग | प्राइमरी वाइंडिंग सप्लाई याने AC voltage supply दिया जाता है और सेकेंडरी साइड से आउटपुट मिलता है | सेकेंडरी साइड में लोड कनेक्टेड होता है | यह दो windings electricaly अलग अलग होती है लेकिन magneticaly जुडी होती है | आउटपुट वोल्टेज वाइंडिंग के तुर्न्स के ratio पर निर्भर होता है |

Autotransformer :-

जैसे की हमने देखा की  साधारण ट्रांसफार्मर में दो वाइंडिंग होती है लेकिन Autotransformer में प्राइमरी वाइंडिंग ओए सेकेंडरी वाइंडिंग series में जुडी होती है | इसमे एक ही coil होती है उसीमे प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग होती है |

6) कुलिंग के आधार पर (based on cooling) :-

1) Air Natural (AN) cooling of transformer

2) Air force (AF) or Air Blast

3) Oil Natural Air Natural (ONAN)

4) Oil Natural Air Force (ONAF)

5) Oil Force Air Force (OFAF)

6)Oil Natural Air Force (ONAF)

7)Oil Force Air Force (OFAF)

 
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Transformer Test (ट्रांसफार्मर जोड़ने से पहले की जाँच ):-

Open circuit test :-

open circuit test को no-load test भी कहा जाता है | इसमे सेकेंडरी याने HV साइड को open रखा जाता है,इसका इस्तेमाल no-load loss और core loss को determine करने के लिए स्तेमाल किया जाता है 

Short circuit test :-

इसको impedance test भी बोला जाता है यह एक किफ़ायती तरीका है | इसके HV साइड में वाल्टमीटर,अमीटर और वाटमीटर को लगाया जाता है | जब यार test किया जाता है तब कोर loss को बोहोत कम लिया जाता है | इसका इस्तेमाल copper loss को determine करने के लिए एस्टाल किया जाता है जब ट्रांसफार्मर त्रास्फार्मे फुल लोड पर होता है |

Earth continuty test:-

इसका इस्तेमाल earth continuty check करने के लिए होता है टेस्ट लैंप का इस्तेमाल करके यह test किया जाता है , एक तार को transformer के बॉडी में लगाया जाता है और दूसरा तार फेस की तार से जोड़ दिया जाता है अगर टेस्ट लैंप जला to ट्रांसफार्मर अर्थिंग अछि तरीके से कम कर रही है |

Types of Transformer testing (ट्रांसफार्मर टेस्टिंग के प्रकार):-

Factory test (फ़ैक्टरी जाँच):-

  1. Type test
  2. Routine test
  3. Special test

On site test (साइट पर  परीक्षण):-

  1. Condition monitouring test
  2. Emergency test
  3. Pre-commission test

Type test on transformer include:-

  • Winding resistance test 
  • Transformer ratio test
  • On load tap changer test
  • Vector group test
  • Impedance test or short circuit test
  • Open circuit test or no-load loss and current measurement
  • Insulation resistance test ( Megger tester )
  • Dielectric test
  • Temperature rise test
  • Tank vacuum test 

Routine test on transformer include:-

  • Winding resistance test 
  • Transformer ratio test
  • Vector group test
  • Impedance test or short circuit test
  • Open circuit test or no-load loss and current measurement
  • Insulation resistance test
  • Dielectric test
  • Oil pressure test 
Transformer oil testing detail information 

Special test on transformers include:-

  • Short circuit test
  • Acoustic sound test
  • Zero-sequence impedance measurement test
  • Dielectric test
  • Harmonic measurement on no-load current test
  • Power was taken by pumps and fan measurement
  • Buchholz relay, temperature indicator, oil preservation system testing
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Transformer protection device (ट्रांसफार्मर के बचाव के लिए लगाने वाले यंत्र)

1) Buchholz relay (बकहोल्ज़ रिले)

2) Earth fault relay (अर्थ फाल्ट रिले)

3) Over current relay (ओवर करंट रिले)

4) Diffential relay (डीफ्रनशिअल रिले)

5) Lightning arrester ( लाइटनिंग अरेस्टर )

 
 
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आज हमने क्या सिखा

 
आज इस आर्टिकल में हमने जाना की transformer kya hai ? What is transformer in hindi ट्रांसफार्मर के बारेमे जो कुछ भी जाना वो आपको जरुर पसंद आया होगा अगर पसंद आया तो कमेंट में जरुर बताना . आज हमने यह भी सिखा की transformer का कार्य सिधांत क्या है , और types of transformer और भी बोहोत सारी बाते सिंखी 
अगर इसमे कुछ सुज्हाव है या कुछ और जानकारी होनी चाहिए ऐसा लगता है to कमेंट में जरुर बताना
 
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नमस्ते दोस्तों Electrical dose इस ब्लॉग्गिंग वेबसाइट में आपका स्वागत है | इस वेबसाइट में हम आपको इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स के बारेमे बोहोत सारी अछि महत्वपूर्ण,और उपयोगी जानकारी जानकारी देते है. मैंने इलेक्ट्रिकल अभियांत्रिकी याने electrical engineering में diploma और Bachelor of engineering की है मुझे इलेक्ट्रिकल के बारेमे थोड़ी बोहोत जानकारी है, इसी लिए मैंने यह तय कर लिया की इस क्षेत्र में ब्लॉग बनाऊ और थोड़ी बोहोत जानकारी आपतक पहुचाऊ |

2 COMMENTS

    • सर इस टेस्ट में ट्रांसफार्मर ऑयल को एक टेस्ट सेल में लेकर उसमे से ac वोल्टेज को गुजारा जाता है आर्बुसेम से कितना करेंट गुजरता है यह मापा जाता है। इस टेस्ट को dielectric dissipation test ya p.f test भी कहा जाता है।
      ट्रांसफार्मर ऑयल टेस्टिंग के ऊपर एक और आर्टिकल है Transformer oil testing in hindi

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