What is electricity tariff in hindi ?| इलेक्ट्रिसिटी tariff क्या है ?

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What is Electricity Tariff in Hindi? इलेक्ट्रिसिटी tariff क्या है?

What is Electricity Tariff in Hindi ?| इलेक्ट्रिसिटी tariff क्या है? इलेक्ट्रिसिटी का एस्तेल आज कल सभी कामो मी किया जाता है इसके बिना कोई कम करना बोहोत ही कठिन हो जायेगा, दुनिया के सभी हिस्सों मी या यु कहे 95% आबादी तक बिजली पोहोच चुकी है | हम रोजाना बिजली का इस्तेमाल करते है लेकिन उसपे कोंसे tariff  याने की टैक्स लगता है उसके बारेमे बोहोत कम लोग जानते है | तो इस आर्टिकल में हम ईएसआई के बारेमे जननी कोशिश करते है क what is electrical tariff, types of  tariff  और tariff के फायदे,tariff meaning और उकसन के बारे जानकारी लेते है |
 
What is electricity tariff in hindi ?| इलेक्ट्रिसिटी tariff क्या है ?
Electricity tariff

 

What is tariff? (टैरिफ क्या है ?) :-

(What is tariff in electrical ?)
 
Definition:- The rate at which the electrical energy is supplied to a consumer is known as a tariff.
जिस दर पर उपभोक्ता को विद्युत् उर्जा  की आपूति की जाती है उसे ही टैरिफ कहा जाता है |
 
इलेक्ट्रिकल एनर्जी को पॉवर स्टेशन में उत्पन्न किया जाता है उसके बाद उसे उपभोक्ता को आपूर्त याने supply किया जाता है |अगर इलेक्ट्रिसिटी को सभी उपभोक्ता को एक ही रेट पर supply किया जाये तो ये सही नहीं रहेगा इसी लिए अलग अलग उपभोक्ता को अलग अलग रेट पर electrical का supply किया जाता है |
 
टैरिफ को इसतरह चार्ज किया जाता है की consumer को सही मूल्य देना पड़े और इलेक्ट्रिसिटी जनरेटिंग कंपनी को फायदा भी हो | tariff में production cost और supply cost साथी साथ profit भी सामिल हो इसी लिए अलग अलग उपभोक्ता को अलग अलग रेट लगाया जाता है | और ये रेट consumer पे भी निर्भर रहता है क्यू की अगर लोड बढेगा तो generation भी बढेगा |
 
 

Tariff  should include following points (टैरिफ में निचे दिए गए अंक को सामिल किया जाता है )

  • gereration में लगने वाली cost की recovery
  • transmission और distribution में लगने वाले cost की recovery
  • operation और maintenace में लगाने वाले cost की recovery
  • थोडा बोहोत profit capital investment पे

Charateristics of tariff (टैरिफ की कुछ विशेषताएँ) :-

1)Fairnes (निष्पक्षता) :-   

तारीफ़ इस तरह से निष्पक्षता बना हो ताकि विविध प्रकार की उपभोक्ता इलेक्ट्रिसिटी रेट से सहमत हो |बड़े consumer को कम रेट लगाया जाता है छोटे consumer के मुकाबले क्यू की energy की खपत जहा ज्यादा होती हवा फिक्स cost रहेगा अससे जनरेशन cost पर फरक पड़ता है |
 

2)proper Return (बराबर रिटर्न  ):- 

proper return मतलब की यह सुनिश्चीत हो जाये की हर consumer से बराबर रिटर्न आये मतल जितना मूल्य इलेक्ट्रिसिटी बनाने में lag रहा है और उसमे कुछ प्रॉफिट भी हो रहा है उतना ह मूल्य consumer से लिया जाये  इस वजह से यह सुनिश्चित होता है की सभी उपभोक्ता को सही तरीके से प्रॉपर इलेक्ट्रिसिटी का supply होता रहे |
 

3)Simplycity (आसान) :-

 
टैरिफ को ऐसा चाहिए ताकि साधारण उपभोक्ता भी असनिसे tarrif या फिर चार्जेज को  आसानी से समझ सके | अगर टैरिफ को समझना मुश्किल है तब consumer की तरफ से बोहोत साडी complaints आयेन्गी|
 

4)Reasonable profit ( उचित फायदा ):-

 
फायदे का ये तत्व है वह उचित होना बहोत जरुरी है | भारत मे इलेक्ट्रिसिटी प्रदान करने वाली कंपनि एक public sector के अन्दर आती है इस लिए compition नहीं है इसी लिए इसमे लगाया जाने वाली मुद्रा याने cost safe है| public sector होने की वजह से यहाँ profit की मात्र तय की गयी है याने लगभग 8% .


5)Attractive (आकर्षित):-

 
टैरिफ आकर्षित होना चाहिए मतल जीता हम pay करते है उसी हिसाब से हमें बिजली मिलनी चाहिये अससे दुसरे consumer मी उत्साहित हो के electrical energy को इस्तेमाल करे 
 
 

Electricity tariff depends on following points (इलेक्ट्रिसिटी टैरिफ निर्भर होते है ):-

 

1)Amount of energy used (कितनी इलेक्ट्रिसिटी इस्तेमाल की गयी )

2)power factor of the load (लोड का पॉवर फैक्टर)

3)Time at which load is required (जब लोड आता है तब का time) 

4)load type (लोड कोनसे प्रकार का है )

 

1)Amount of energy used (कितनी इलेक्ट्रिसिटी इस्तेमाल की गयी ):-

 
अगर ज्यादा समय तक निरंतर इलेक्ट्रिकल पॉवर का इस्तेमाल किया जाये तब cost कम हो जाती है |
 

2)power factor of the load (लोड का पॉवर फैक्टर):-

 
पॉवर फैक्टर बोहोत महत्त्व पूर्ण रोले अदा करता है पॉवर प्लांट के अर्थशास्त्र में अगर पॉवर फैक्टर कम हो गया तो लोड करंट बढ़ जायेगा और उसकी वजह से पुरे सिस्टम में losses बढ़ जायेंगे | पॉवर फैक्टर को सही बनाये रखने के लिए कई उपकरानोका का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इलेक्ट्रिसिटी उत्पादन करने का मूल्य बढ़ जाता है |
 

3)Time at which load is required (जब लोड आता है तब का time):-

 
कोंसे वक्त पॉवर plant पर ज्यादा लोड आ रहा है वह भी जरुरी है अगर थोड़ी समय के लिए ज्यादा लोड आ रहा है उस वक्त अधिक पॉवर प्लांट की जरुरत पद सकती है 


4)load type (लोड कोनसे प्रकार का है ):-

 
लोड कोनसे प्रकार का है वह भी देखना जरुरी है |लोड तिन प्रकार के है domestic(घरेलू),indistrial(औद्योगिक) और commercial (व्यावसायिक) घरेलु इस्तेमाल से ज्यादा पॉवर औद्योगिक में इस्तेमाल होती है  ईएसआई लिए टैरिफ औद्योगिक के लिए ज्यादा होता है घरेलु के मुकाबले |टैरिफ का मूल्य इस्तेमाल के अदाहर पर बदलता रहता है |
 
 

Types of electricity tariff (इलेक्ट्रिसिटी टैरिफ के प्रकार ):-

  1. simple tariff
  2. Flat rate tariff
  3. Block rate tariff
  4. Two-part tariff
  5. Maximum demand tariff 
  6. Power factor tariff
  7. Three-part tariff 
 
 

1) Simple tariff (साधारण  टैरिफ ):-

 
When there is a fixed rate per unit of energy consumed, it is called a simple tariff or uniform tariff.
जब एनर्जी के हर ईस्तेमाल किये गए हर यूनिट का मूल्य तय रहता है तब उसे सिंपल टैरिफ कहते है |  
 
इसमे per unit का मूल्य तय मतलब की fixed रहता है याने की अगर ज्यादा यूनिट्स भी इस्तेमाल किये जाये तभी मूल्य उतना ही रहता है per यूनिट का | उपभोक्ता कितने यूनिट्स कमेस्तेमल कर रहा है यार मापने के लिए enegy meter लगाया जाता है| यह बोहोत आसन है और सभी उपभोक्ता को आसानी से समझ में आता है |
 
Disadvantages of simple tariff:- इसमे हर consumer के लिए सेम तय किये गए charges लगते है|cost per यूनिट का मूल्य ज्यादा होता है |र्ल्रक्ट्रिसिटी इस्तेमाल करने के लिए प्रोतासन नहीं देता |
 


2) Flat rate tariff  (फ्लैट रेट टैरिफ):-

 
Different types of consumers are charged at different uniform per unit rates is called a flat-rate tariff.
जब अलग अलग उपभोक्ता को अलग अलग चार्ज किया जाता है per यूनिट के हिसाब से तब उसे फ्लैट रेट टैरिफ कहते है |
 
इस प्रकार में उपभोक्ता का अलग अलग ग्रुप बनाये जाते है और अलग अलग ग्रुप को अलग अलग रेट से चार्ज किया जाता है per यूनिट के हिसाब से | इस तरह के सिस्टम का यह फायदा है की निष्पक्षता बनी रहती है |
 
Disadvantages of flat-rate tariff:-अलग अलग एनर्जी meter का इस्तेमाल करना पतड़ा है अलग अलाल्ग उप्पभोक्ता के लिए इससे ये प्रक्रिया जटिल हो जाती है |
 

3)Block rate tariff (ब्लॉक रेट टैरिफ):-

 

When a given block of energy is charged at a specified rate and the succeeding blocks of energy are charged at progressively reduced rates, it is called a block rate tariff.

 
ब्लॉक रेट टैरिफ में एनर्जी के इस्तेमाल की अधर पर कुछ ब्लॉक वे विभाजित की जाती है और हर ब्लॉक का मूल्य per यूनिट के हिसाब से तय किया जाता है | इस तरह के टैरिफ का फायदा ये है की उपभोक्ता हो इंसेंटिव्ह मिलता है |यह टैरिफ ज्यादा  रेजिडेंशियल और छोटे commercial consumers के लिए इस्तेमाल किया जाता है |
 

4)Two-part tariff:-

 
When the rate of electrical energy is charged on the basis of the maximum demand of the consumer and the units consumed, it is called a two-part tariff.
 
पैर यूनिट चार्ज कितना रहेगा ये उपभोक्ता पर निर्भर रहता है इस लिए charges को दो parts में devide किया जाता है -fixed charges और running charges. fixed charges मैक्सिमम डिमांड पर निर्भर रहते है और running charges निर्भर होते है कितने यूनिट्स कोनुमेर से इस्तेमल किये है| यह समझना आसान है और यह fixed charges को भी रिकवर करता है |
 
Total charges = Rs(b×kW+c×kWh)
 
b=charge per kW of maximum demand 
c=charge per kWh of energy consumed  
 
 

5)Maximum demand tariff:- 

 
यह टू पार्ट टैरिफ की तरह ही होता है लिकिन इसमे यह अलग बात है की उपभोक्ता के ठिकाने से maximum demand कितना है यह नापा जाता है उकसे लिए एक device लगाया जाता है उसे कहते है maximum demand meter | यह टैरिफ ज्यादा tar बड़े उपभोक्ताओ के लिए इस्तेमाल किया जाता है |
 


6)Power factor tariff:-

 
The tariff at which the power factor of the consumer is taken into consideration is known as the power factor tariff.
 
AC सिस्टम में पॉवर फैक्टर एक महत्त्व पूर्ण टर्म है अगर पॉवर फैक्टर कम हो गया तोतो line में losses बढ़ जायेंगे |अगर किसी उपभोक्ता का पॉवर फैक्टर कम है तो उसे दंड देना पड़ता है |
पॉवर फैक्टर टैरिफ में निचे दिए गए प्रकार है :-
 
a) kVA maximum demand tariff :- यह twopart tariff से modify करके बनाया गया है इसमे जो fixed cheges है वह maximum demand के kVA के तत्व पर निर्भर है नाकि kW. इस तरह के टैरिफ का ये फायदा है की ये उपभोक्ता को अपनी मशीने का पॉवर फैक्टर अच्छा रखने के लिए प्रेरित करती है |
 
b)Sliding scale tariff :- इसे एवरेज पॉवर फैक्टर टैरिफ भी कहते है इसमे एवरेज पॉवर फैक्टर  0.8 lagging को लिया जाता है| अगर उपभोक्ता का पॉवर फैक्टर कम हो गया to उसे अधिक मात्रा मे चार्ज लगाये जाते है | और अगर पॉवर फैक्टर रेफ़रन्स के ऊपर गया तब उपभोक्ता को discount भी दिया जाता है |

c) kW and kVAR tariff:-इसमे एक्टिव पॉवर (kW) और रिएक्टिव  पॉवर (kVAR) को अलग अलग चार्ज किया जाता है |

 

7)Three-part tariff:-

 
When the total charge to be made from the consumer is split into three parts viz. fixed charge, semi-fixed charge, and running charge, it is known as a three-part tariff.
 
 
Total charge = Rs(a+b×kW+c×kWh)
 
where          a= fixed charges 
                    b=charge per kW of maximum demand 
                    c=charge per kWh of energy consumed 
 
 
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